दादाजी का गजब दिमाग।
दादाजी का गजब दिमाग। एक घर में दादा-दादी अपने कमरे में चैन की नींद सो रहे थे। तभी दादी की नज़र खिड़की से बाहर पड़ी और वो दादा से बोलीं, “सुनते हो जी… गैराज की लाइट जल रही है। ज़रा जाकर बंद कर दोगे क्या?” दादाजी ने कराहते हुए अपनी बूढ़ी हड्डियों को हिलाया, खिड़की से झाँका और जो देखा… होश उड़ गए! गैराज के दरवाज़े पर पाँच-छह चोर ऐसे लगे थे, जैसे कोई खजाना लूटने आए हों। दादाजी बिना समय गंवाए फोन उठाते हैं और 100 नंबर डायल करते हैं। “हैलो… पुलिस स्टेशन? घर में सिर्फ हम दो बुज़ुर्ग हैं। अभी कुछ लोग हमारे गैराज का ताला तोड़ रहे हैं। जल्दी मदद भेजिए!” उधर से जवाब आया, “सर, आपकी जानकारी नोट कर ली है… लेकिन फिलहाल कोई टीम उपलब्ध नहीं है। जैसे ही मिलेगी, भेजेंगे।” दादाजी का बीपी सीधे हाई हो गया चोर अभी भी दरवाज़े से जंग कर रहे थे। दो मिनट बाद दादाजी फिर से फोन मिलाते हैं, “अब किसी को भेजने की ज़रूरत नहीं है। मैंने सबको गोली मार दी है!” फोन कटते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया! पाँच मिनट के अंदर पुलिस गाड़ियाँ, हेलीकॉप्टर, डॉक्टर, पैरामेडिक और एंबुलेंस— सब घर के बाहर! चोरों को रंगे हाथ...