सेल्समैन की चालाकी।

 सेल्समैन की चालाकी

एक जूते की दुकान के मालिक को एक कुशल बिक्री प्रतिनिधि (सेल्समैन) की आवश्यकता थी।

उसने अख़बार में विज्ञापन दिया। कई उम्मीदवार आए, लेकिन कोई भी मालिक को संतुष्ट नहीं कर पाया।

आख़िर में एक युवक बचा।


दुकानदार ने उससे पूछा —

“क्या तुम इस जूते की जोड़ी को 500 रुपये में बेच सकते हो?”


युवक बोला —

“सर, मैं इसे 550 रुपये में बेच सकता हूँ।”


दुकानदार ने कहा —

“अगर तुमने ऐसा कर दिखाया, तो तुम्हारी नौकरी पक्की और वेतन भी डेढ़ गुना होगा।”


युवक ने मुस्कुराकर कहा —

“ठीक है।”


वह दुकान में खड़ा होकर ग्राहक का इंतज़ार करने लगा।

थोड़ी देर में एक ग्राहक दुकान में दाख़िल हुआ।

युवक ने मुस्कुराकर स्वागत किया और बोला —

“कहिए सर, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?”


ग्राहक बोला —

“मुझे अच्छे जूते चाहिए।”


युवक ने बिना समय गंवाए कई जूते दिखाए, उनके दाम भी बताए।

ग्राहक देखता जा रहा था, और युवक लगातार जूते दिखाता रहा।


अंत में उसने वही जूते की जोड़ी दिखाई, जिसकी ओर दुकानदार ने इशारा किया था, और बोला —

“सर, यह इस दुकान के सबसे मज़बूत और बेहतरीन जूते हैं।”


उसने जूतों की इतनी तारीफ़ की कि मानो प्रशंसा के पुल बाँध दिए हों।

साथ ही वैसी ही एक और जोड़ी निकालकर बोला —

“बस ये दो ही जोड़ियाँ बची हैं।”


ग्राहक जूते देखने लगा और बोला —

“इनकी कीमत क्या है?”


युवक बोला —

“पहले ये 600 रुपये में बिकते थे, लेकिन अब सिर्फ़ दो जोड़ियाँ बची हैं, इसलिए आपको 550 रुपये में दे देंगे।”


दुकानदार सब कुछ ध्यान से देख रहा था।


ग्राहक बोला —

“जूते अच्छे हैं, लेकिन दाम ज़्यादा हैं।”


युवक ने आत्मविश्वास से कहा —

“सर, ऐसे मज़बूत और टिकाऊ जूते आपको और कहीं नहीं मिलेंगे।”


ग्राहक बोला —

“आप सही कह रहे हैं, लेकिन मेरे पास अभी इतने रुपये नहीं हैं।”

यह कहकर वह जाने लगा।


युवक ने मुस्कुराकर कहा —

“रुपयों की चिंता क्यों करते हैं सर? आप हमारे सम्मानित ग्राहक हैं।

अगर जूते पसंद हैं, तो पैसे बाद में दे दीजिएगा।”


ग्राहक बोला —

“पर…”


युवक ने बात काटते हुए पूछा —

“अभी आपके पास कितने रुपये हैं?”


ग्राहक बोला —

“मेरे पास अभी सिर्फ़ 450 रुपये हैं।”


युवक बोला —

“कोई बात नहीं, आप जूते ले जाइए। बाकी रुपये बाद में दे दीजिएगा।”


उसने जूते पैक किए और ग्राहक को दे दिए।

ग्राहक ने 450 रुपये दिए, धन्यवाद कहा और चला गया।


युवक ने वे 450 रुपये दुकानदार को दे दिए।


दुकानदार नाराज़ होकर बोला —

“यह तुमने क्या किया? 550 रुपये में बेचने की बात थी और 450 में दे दिए!

मुझे 100 रुपये का नुकसान हो गया।”


युवक बोला —

“चिंता मत कीजिए सर, वह बाकी पैसे घर से लाकर दे जाएगा।”


दुकानदार ग़ुस्से में बोला —

“क्या तुम्हें लगता है वह वापस आएगा?”


युवक पूरे आत्मविश्वास से बोला —

“हां, वह जरूर वापस आएगा।”


दुकानदार ने गुस्से में कहा " तुम इतने विश्वास से कैसे कह सकते हो?"


युवक मुस्कुराते हुए बोला —

क्योंकि मैंने उसे दोनो जूते एक ही पैर के दे दिए हैं।

दुकानदार कुछ पल तक उसका मुँह देखता रहा…

फिर ज़ोर से हँस पड़ा और बोला —

“तुम्हारी नौकरी पक्की।”


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